बैशाख की दमकती धूप में,
अपने सहारे खड़े होने को मचलती
स्वाभिमान से भरी, जोश के पात पहने,
उस नवयौवना लता के उत्साह में कमी ना थी।
दृढसंकल्प उसका दे रहा था चुनौती,
कौन रोकेगा उसकी सवित्रमयी 'उड़ान' को।
जब साथ है सर्वशक्तिमान, जो है उसका आराध्य।
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