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शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

भ्रष्टाचार और अन्ना / विजय शंकर मिश्र "भास्कर"

सडकों पे चकती लगी , बुरा देश का हाल
भ्रष्टाचारी तंत्र में जनता है बेहाल I

जनता है बेहाल बढ़ी जाती महगाई
दिन दिन बढ़ता भाव त्रस्त जनता चिल्लाई
कह भास्कर ललकार बजा अन्ना का डंका
निकल पड़े हनुमान जलाने को लंका I

त्रेता का भगवान एक हनुमान पठाया
जिसने रावन की लंका में आग लगाया
अन्ना के हनुमान चल पड़े लाख करोनो
सुन लो उनकी बात भ्रस्त आचरण छोड़ो I

कह भास्कर ललकार जलेगी धू धू लंका
अब भी चेतो बजा दिया अन्ना ने डंका I

अन्ना है भगवान देश के दिल की धड़कन
इकराना छोड़ दो तजो उनसे अब अनबन
उनसे अनबन छोड़ दो राष्ट्रहित बात विचारो
कोटि कोटि जन गरज रहे ये दृश्य निहारो I

कह भास्कर ललकार की अब जनता ऊब गयी है
और भ्रस्त तंत्र की लाज सरम सब डूब गयी है I

उदित राष्ट्र के मंच पर अन्ना प्रखर पतंग
हैं अरविन्द प्रशांत अब बेदी किरण तरंग
बेदी किरण तरंग क्रांति की शौम्य प्रतिमा
भारत जग का भाल प्रतिष्ठित उसकी गरिमा I

कह भास्कर ललकार क्रांति अब रोके न रुकेगी
टकराना छोड़ दो शांति में क्रांति उगेगी I

विनय न माना जलधि जल गए तीन दिन बीत
भ्रस्त तंत्र शातिर हुआ भय बिनु होया न प्रीति
भय बिनु होय न प्रीति युवा जन आगे आओ
राजगुरु सुखदेव भगत सिंह तुम बन जावो इ

कह भास्कर ललकार तुम्ही अन्ना के बल हो
भारत की हो शान तुम्ही उज्जवल हो कल होइ

फूल गए तुम रामदेव को देकर झांसा
वाही चल फिर चले पद गया उल्टा पाँसा
उल्टा पाँसा पड़ा गयी एम्बुलैंस खदेड़ी
चेतो चेतो सत्ता मद में चूर नसेड़ी I

कह भास्कर ललकार की युग परिवर्तन होगा
बदलो अपनी चाल क्रांति का नर्तन होगा
गाँधी मोहनदास पुनः अन्ना बन आये
सच्ची आजादी का आकर बिगुल बजाये इ

बाल , वृद्धजन , युवा , साधू , ब्यापारी जागे
जागे सभी किसान सिपाही सैनिक जागे
कह भास्कर ललकार जग रहे हैं कुछ नेता
शुभ लक्छ्न है आज भला उनका मन चेता ॥

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